रविवार, 1 जनवरी 2017


स्नायविक संस्थान का महत्तव 
स्नायविक संस्थान की कमजोरी से मनुष्य के स्वभाव व्यवहार तथा जीवन के प्रति नजरिये मे भी परिवर्तन आ जाता है जिसका कई बार स्वंय उस व्यक्ति को भी पता नही चल पाता । ये कोई छोटी मोटी बात नही है जीवन तथा शरीर का कंट्रोल मस्तिष्क द्वारा ही होता है । अगर मस्तिष्क स्वतंत्रता महसूस नही करता तो उसकी शक्ति बिखर जाती है वह अपने लक्ष्यों पर केन्द्रित नही हो पाता । ज्यादा चिंता करना, किसी व्यक्ति-परिस्थितयों से भय मानना, कार्य को करने-न-करने के लिए मन व मस्तिष्क में कशमश, आवश्यक पौष्टिक तत्वयुक्त भोजन का अभाव, किसी भी प्रकार से शरीर की शक्ति का नष्ट होना आदि से स्नायविक संस्थान धीरे-धीरे कमजोर होता चला जाता है मनुष्य का अपने ऊपर से विश्वास कम होता चला जाता है वह सिर्फ सोचता रहता है कर पाता कुछ नही । धीरे-धीरे वह दब्बू भीरू डरपोक स्वभाव वाला बनता चला जाता है ऐसे लोग अपने लिए तथा समाज के लिए कोई खास योगदान नही दे पाते वह अपने गुणो काबलियत को पूरी तरह से जीवन में प्रयोग नही कर पाते हालांकि प्रतिभा की उनमें कोई कमी नही होती ।
आप कितनी भी प्रेरक किताबे पढ़ लें, बाते सुन लें जब तक आपका ह्रदय तथा स्नायविक संस्थान मजबूत नही है आप उन बातो पर अमल नही कर पायेंगें । आपको लगेगा ये सब केवल बाते हैं इनमे कोई दम नही । आप एक निराशा की काली चादर ओढ़े रहेंगे और आपको पता भी नही चलेगा कि आपके साथ ऐसा हो क्यूँ रहा है । सब प्रकार का उत्साह उमंग तरंग विश्वास साहस मन तथा मस्तिष्क की मजबूती पर निर्भर है ।
मनुष्य का स्नायविक संस्थान बहुत ही नाजुक चीज है । अतः उसका स्वस्थ मजबूत रहना अतिआवश्यक है । नीचे निम्नलिखित उपाय तथा कुछ औषधियों का परिचय दिया जा रहा है जिन्हें आजमाकर स्नायविक संस्थान की कमजोरी को दूर किया जा सकता है । 


1- हौम्योपैथी दवाईयो के स्टोर पर एक दवा मिलेगी जिसका नाम है- काली फॉस-१२ ये दवा जर्मन- कम्पनी की लें आयें तथा इसकी चार-चार गोली दिन में तीन बार एक प्याला हल्के गर्म पानी के साथ लें । बच्चो को 2-2 गोलीं दें ।
2- शतावरी चूर्ण एक-एक चम्मच दिन में दो बार पानी के साथ लें ।
3- ब्राह्मी का चूर्ण एक-एक चम्मच दिन में दो बार पानी के साथ लें ।
4- “हंसी हस्तमुद्रादोनो होथों से एक साथ करें 15 मिनट से शुरू करके धीरे-धीरे 45 मिनट तक पहुँचे । दिन मे एक बार करना काफी है ।
5- सुबह सूर्य की हल्की कुनकुनी धूप में 20-30 मिनट बैठें । सूर्य की धूप में बैंठने से कई प्रकार के Good hormones का स्राव मस्तिष्क में होता है जो मस्तिष्क के लिए काफी लाभदायक होतें हैं ।
6- एक गिलास गाजर तथा चुकंदर का ज्यूस पीये । ये कई विटामिन्स प्रदान करते हैं जो शरीर मस्तिष्क के लिए वरदान की तरह होते हैं ।
7- ज्ञान मुद्रा में बैठकर कम से कम 30 मिनट ध्यान करें ।
8- रोज प्रातः अनुलोम-विलोम प्रणायाम 20-30 मिनट करें ।
9- रोज प्रातः भ्रामरी प्रणायाम 5-10 मिनट करें ।
10- बाजार से अलसी के बीज ले आयें मिक्सी मे पीस कर रख लें, 20-20 ग्राम दिन में दो बार, एक गिलास हल्के कुनकुने गर्म पानी के साथ सेवन करे ।
11- चुटकलों की किताब पढ़े या कोई हँसी मजाक की फिल्म देखें क्योकि हँसने के दौरान दिमाग की नसे सबसे ज्यादा रिलेक्स होती है तथा उन्हें ताकत मिलती है
12- “मैं कर सकता- हूँ मैं करूँगाप्रत्येक कार्य करते समय यही भाव मन में रखें । बार बार मस्तिष्क को ऐसे संदेश भेजने से उसका असर ह्रदय तक पहुँचता है तथा ह्रदय मे आत्मविश्वास पैदा होता है फिर चाहे जमाना आपको किसी भी लायक न समझता हो कोई फर्क नही पड़ता ।
13- कभी भी ऐसा व्यवहार न अपनायें कि कोई कार्य आप किसी को दिखाने के लिए या उसे प्रभावित करने के लिए कर रहें हैं इससे अपने खुद के आत्मसम्मान को ठेस पहुँचती है । तथा मस्तिष्क पर अनावश्यक दबाव बनता है मस्तिष्क कमजोर होता है । जो करना है अपने लिए तथा अपनों के लिए किजिए ।
14- एक वक्त मे केवल एक कार्य किजिए पूरी एकाग्रता के साथ पूरी समझ तथा पूरे आत्मविश्वास के साथ ।
15- क्या आप जानतें हैं कि अगर खाना उस तरह से खाया जाय जिस तरह से खाया जाना चाहिए तो इससे न केवल हमारे मन को सन्तुष्टि मिलती है ब्लकि दिमाग को भी पुष्टि मिलती है और वह तरीका है कि खाना खाते समय अपनी आखें तथा अपने कान बन्द रखें जाये ताकि खाने का स्वाद तथा उसकी खूशबु का अहसास, आपके दिमाग के प्रत्येक भाग तक पहुँच सके और ऐसा होने पर विभिन्न प्रकार के Good hormones का स्राव आपके पाचनतंत्र में होगा तथा आपका खाना बढ़िया ढ़ंग से पचेगा और शरीर में लगेगा, रूप और रंग विशेष रूप से निखरेंगे । रोटी का एक टुकड़ा सब्जी से तर कर लिजिए तथा उसे मुँह में रख लिजिए अब अपनी आँखें बन्द कर लिजिए तथा इसे चबाते जाइये जब तक कि यह पानी की तरह पतला न हो जाय तथा अपना ध्यान इसके स्वाद तथा इसकी खुशबू को महसूस करने पर लगा दिजिए । होता क्या है कि जब आप टी.वी. मोबाईल या अखबार पढ़ते हुए खाना खाते हैं तो खाने का जो स्वाद है उसको तो आप महसूस कर लेते है लेकिन खाने की खूशबू को पूरी तरह से महसूस नही कर पाते जिससे जबान तो सन्तुष्ट हो जाती है लेकिन मन तथा मस्तिष्क सन्तुष्ट नही हो पातें तथा एक कमी सी रह जाती है ।
16- बेमतलब की खबरें, बातें, टी.वी. प्रोग्राम देखना, मोबाईल का बेमतलब का इस्तेमाल मन पर बुरा प्रभाव डालता है मन की शान्ति को भंग करता है अनेक प्रकार के विचार संकल्प-विकल्प की लहरें मन-मस्तिष्क में उठती है उन्हें बैचेन करती है, ऐसा करने से बचे । पुराने समय में लोग आपस में हिल मिल कर बैठते थे एक दूसरे से अपने गम खुशी बांटते थे विभिन्न प्रकार के Outdoor Games खेलते थे मानसिक रूप से शान्त खुश रहते थे लेकिन मोबाईल आने के बाद सब अपने मे सिमट कर रह गये है बाते भी करते हैं तो फोन पर ।
किसी के अनपेक्षित व्यवहार करने पर झुंझलाये ना क्योकि स्नायविक संस्थान को सबसे ज्यादा क्षति झुंझलाने से किलसने से पहुँचती है । अगर किसी के द्वारा कही जा रही कोई बात आपको पसंद नही आ रही हो तो अपने कानों को बन्द कर लिजिए । जरूरी नही सबका कूड़ा कचरा अपने दिमाग मे भरा जाय । अक्सर मनुष्य का मन कुछ और करना चाहता है तथा मस्तिष्क कुछ और करने की सलाह देता है । ऐसी अवस्था में मनुष्य एक ही जगह बैठा रहता है तथा दोनो के मध्य उसके अन्दर द्वन्द चलता रहता है । उसकी काफी मानसिक ऊर्जा इन दोनो के द्वन्द में ही खर्च हो जाती है ऐसी अवस्था में थोड़ी देर के लिए उस कार्य को स्थगित कर देना चाहिए । बाद मे उस पर पुनः विचार करना चाहिए तो हो सकता है तब वह द्वन्द समाप्त हो चुका हो तथा एक बेहतर और लाभकारी निर्णय लिया जा सके 

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